पांच देशों की यात्रा करने के बाद वापस अपने देश का रुख कर चुके हैं पीएम मोदी

by admin477351

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी घाना, त्रिनिदाद एंड टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राजील और नामीबिया की यात्रा के बाद गुरुवार को हिंदुस्तान लौट आए हैं. विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी की यह यात्रा सफल रही है.

पीएम मोदी ने पांच राष्ट्रों की अपनी यात्रा में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है. उन्होंने अब तक 17 विदेशी संसदों में भाषण दिए, जो कांग्रेस पार्टी के सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों के कुल रिकॉर्ड के बराबर है. उन्होंने यह उपलब्धि जुलाई 2025 के पहले हफ्ते में घाना, त्रिनिदाद एंड टोबैगो और नामीबिया में दिए हाल ही के भाषणों के साथ हासिल की है.

इस वैश्विक सक्रियता से पता चलता है कि प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी हिंदुस्तान के सबसे एक्टिव नेताओं में से एक हैं. कांग्रेस पार्टी पार्टी के पूर्व प्रधानमंत्रियों ने कई दशकों में यह उपलब्धि हासिल की थी, जिनमें मनमोहन सिंह ने सात बार, इंदिरा गांधी ने चार बार, जवाहरलाल नेहरू ने तीन, राजीव गांधी ने दो और पी.वी. नरसिम्हा राव ने एक बार भाषण दिया था.

पीएम मोदी ने केवल एक दशक से अधिक समय में यह संख्या हासिल कर ली, जो हिंदुस्तान के कूटनीतिक दृष्टिकोण में परिवर्तन को दर्शाता है. उनकी हाल की यात्रा न सिर्फ़ अफ्रीका और कैरिबियन राष्ट्रों के साथ हिंदुस्तान के नए संबंधों को दर्शाती है, बल्कि ग्लोबल साउथ में हिंदुस्तान की आवाज की गूंज को भी उजागर करती है. प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी को घाना में ‘ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ घाना’ से सम्मानित किया गया, जो 30 वर्ष से अधिक समय में किसी भारतीय पीएम की यह पहली यात्रा थी.

इसके अलावा, ब्राजील ने उन्हें अपने सर्वोच्च सम्मान ‘ग्रैंड कॉलर ऑफ द नेशनल ऑर्डर ऑफ द सदर्न क्रॉस’ से नवाजा. पिछले शुक्रवार को प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी को त्रिनिदाद एंड टोबैगो की दो दिवसीय यात्रा के दौरान ‘द ऑर्डर ऑफ द रिपब्लिक ऑफ त्रिनिदाद एंड टोबैगो’ सम्मान से सम्मानित किया गया था. वे यह सम्मान प्राप्त करने वाले पहले विदेशी नेता बने हैं.

प्रधानमंत्री मोदी को नामीबिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द मोस्ट एंशिएंट वेल्वित्चिया मिराबिलिस’ से भी सम्मानित किया गया था. यह प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी का 27वां वैश्विक सम्मान है, जो इस पांच राष्ट्रों की यात्रा के दौरान मिला था.
त्रिनिदाद एंड टोबैगो में उन्होंने हिंदुस्तानियों के आगमन के 180 वर्ष पूरे होने के उत्सव के दौरान संसद को संबोधित किया था. उन्होंने अपने संबोधन में विकासशील राष्ट्रों के प्रति हिंदुस्तान के लगातार समर्थन का जिक्र किया था.

त्रिनिदाद एंड टोबैगो में वे 1968 में हिंदुस्तान द्वारा तोहफे में दी गई स्पीकर की कुर्सी के सामने खड़े थे, जिसे उन्होंने समय की कसौटी पर खरी उतरने वाली दोस्ती का प्रतीक बताया. नामीबिया की संसद ने उनसे लोकतांत्रिक मूल्यों, तकनीकी साझेदारी और स्वास्थ्य और डिजिटल बुनियादी ढांचे में साझा आकांक्षाओं के बारे में बात की थी.

नामीबिया की संसद में जब उन्हें राष्ट्र का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिला तो उस दौरान पार्लियामेंट रूम “मोदी, मोदी” के नारे से गूंज उठा था. यह ऐतिहासिक उपलब्धि सिर्फ़ पर्सनल सम्मान नहीं है बल्कि यह वैश्विक कूटनीति के क्षेत्र में हिंदुस्तान के बढ़ते रसूख को दर्शाता है.

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