अमेरिका ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में हिंदुस्तान के 9 मई के नोटिस को खारिज कर दिया है, जिसमें स्टील और एल्युमीनियम पर उच्च अमेरिकी आयात शुल्क के विरुद्ध जवाबी कार्रवाई का प्रस्ताव दिया गया था. अमेरिका का बोलना है कि उसने जो कदम उठाया है, वह उसके लिए महत्वपूर्ण है. सूत्रों ने कहा कि वाशिंगटन ने बोला कि शुल्क सुरक्षा तरीका नहीं हैं और इसलिए वह इस मामले पर नयी दिल्ली के साथ चर्चा नहीं करेगा. इस वजह से भारत, अमेरिका से आने वाले कुछ सामानों पर अधिक टैक्स लगा सकता है. कहा जा रहा है कि हिंदुस्तान बादाम और अखरोट जैसे अमेरिकी सामानों के लिए कुछ व्यापार लाभों को निलंबित करके और अमेरिकी धातु आयात पर सीमा शुल्क बढ़ाकर उत्तर दे सकता है. हिंदुस्तान के नोटिस में अमेरिका के 10 फरवरी के निर्णय को चुनौती दी गई थी, जिसमें 12 मार्च से सभी स्टील और एल्युमीनियम आयातों पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने का निर्णय किया गया था. यह मुद्दा 30 मई को और बढ़ गया, जब ट्रम्प प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए टैरिफ को दोगुना करके 50 फीसदी कर दिया, जो 4 जून से कारगर हो गया.
अमेरिका द्वारा अपने घरेलू धातु उद्योग की रक्षा के लिए स्टील और एल्युमीनियम पर आयात शुल्क बढ़ाने के उत्तर में हिंदुस्तान ने 9 मई को औपचारिक रूप से विश्व व्यापार संगठन को सूचित किया कि वह 8 जून से 30 दिनों के बाद अमेरिका को दिए गए व्यापार फायदा वापस ले सकता है. हिंदुस्तान के नोटिस के उत्तर में अमेरिका ने 22 मई को विश्व व्यापार संगठन को सूचित किया कि हिंदुस्तान का प्रस्तावित प्रतिशोध वैश्विक व्यापार नियमों के अनुरूप नहीं है. वाशिंगटन ने तर्क दिया कि धातुओं पर उसके टैरिफ “सुरक्षा” तरीका नहीं थे. इन तरीकों के संबंध में सुरक्षा समझौते के अनुच्छेद 8.2 के अनुसार रियायतों या अन्य दायित्वों को निलंबित करने के हिंदुस्तान के प्रस्ताव का कोई आधार नहीं है.
अमेरिका के निर्णय से हिंदुस्तान का जितना निर्यात प्रभावित होगा, अमेरिका से उतनी धनराशि के ही आयात पर हिंदुस्तान भी टैरिफ बढ़ाएगा. हिंदुस्तान में पहले भी इस नियम के अनुसार कदम उठा चुका है. जून 2019 में हिंदुस्तान ने 28 अमेरिकी प्रोडक्ट पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी थी. इनमें बादाम से लेकर सेब और केमिकल शामिल थे. अमेरिका ने जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ़ प्रेफरेंस (GSP) की सूची से हिंदुस्तान को हटा दिया था और स्टील तथा एल्युमिनियम पर टैरिफ जारी रखने की घोषणा की थी. उसी के उत्तर में हिंदुस्तान में यह कदम उठाया था. हिंदुस्तान के उस जवाबी टैरिफ के कारण अमेरिका से लगभग 24 करोड़ $ का आयात प्रभावित हुआ. सितंबर 2023 में जब पीएम मोदी वाशिंगटन गए और दोनों राष्ट्रों के बीच डब्ल्यूटीओ में 6 विवादों को समाप्त करने पर सहमति बनी, तो उसके बाद हिंदुस्तान ने बढ़ा हुआ टैरिफ वापस लिया था.
