China Space Mission : इस मिशन को पूरा करने के उद्देश्य से अंतरिक्ष यात्रियों को तियांगोंग स्पेस स्टेशन पर ले जाया जाएगा चीन

by admin477351

China Space Mission: चीन अपनी तकनीकि की वजह से पूरी दुनिया में जाना जाता है। अब चीन की निगाहें चंद्रमा पर है। वर्ष 2030 तक अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजने की तैयारी चीन ने पूरी कर ली है।  इस मिशन को पूरा करने के उद्देश्य से चीन तीन अंतरिक्ष यात्रियों को लगभग छह महीने के प्रवास के लिए स्वयं के बनाए तियांगोंग स्पेस स्टेशन पर ले जाया जाएगा। इस मिशन का नाम Shenzhou-20 मिशन है।

Shenzhou-20 मिशन उत्तर-पश्चिमी चीन के जिउक्वान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से रवाना होगा। यहां पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्री चीन के 2030 के मिशन को पूरा करने के लिए काम करेंगे। यहां पर एक बेस बनाने की तैयारी है। आनें वाले मिशन को लेकर 6 महीने तक ये अंतरिक्ष यात्री स्पेस स्टेशन पर एक्सीपेरिमेंट करेंगे। इसे लेकर चीन मानवयुक्त अंतरिक्ष एजेंसी (CMSA) के उप निदेशक लिन ज़िकियांग ने बुधवार को बोला कि चीन चंद्र मिशनों का विकास सुचारू रूप से आगे बढ़ा रहा है।

साथ ही साथ लिन ने चीन के तियांगोंग अंतरिक्ष स्टेशन पर शेनझोउ 20 मिशन की घोषणा करने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बोला कि एक सुपरहैवी रॉकेट, मेंगझोउ चालक ग्रुप के अंतरिक्ष यान और चंद्र लैंडर की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर केंद्रित होंगे। आगे बोला कि लॉन्च या रॉकेट की विफलता की स्थिति में या उड़ान के दौरान उस बिंदु पर कुछ गलत होने पर जब अंतरिक्ष यान सबसे अधिक हवा के गति से उत्पन्न हुए तनाव का सामना करता है। चालक दल को सुरक्षित निकालने के लिए अंतरिक्ष यान की प्रणालियों की क्षमता का आकलन करने के लिए जमीनी परीक्षण किए जाएंगे। यह मिशन गुरुवार को भेजा जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने बोला कि टेक्नीशियन चंद्र लैंडर पर एक एकीकृत लैंडिंग और टेक-ऑफ वेरिफिकेशन, रॉकेट के टेथर्ड इंजन इग्निशन परीक्षण और कम ऊंचाई वाली उड़ान भी करेंगे। साथ ही कहा हम निर्धारित समय पर चंद्रमा पर मनुष्यों को लॉन्च करने के लिए एक ठोस आधार तैयार करने के लिए सभी परीक्षणों के सफल समाप्ति को सुनिश्चित करने का कोशिश करेंगे।

बता दें कि दिसंबर में, नासा ने घोषणा की कि उसके स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) और ओरियन अंतरिक्ष यान की पहली चालक दल वाली उड़ान इस वर्ष के अंत से 2026 की तक जा सकती है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी को अपने आर्टेमिस कार्यक्रम में कई अन्य देरी का सामना करना पड़ा है, जो 1972 में अपोलो कार्यक्रम के आखिरी मिशन के बाद पहली बार अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर वापस लाएगा।

बता दें कि चीन और अमेरिका दोनों की निगाहें चंद्रमा पर टिकी हुई है। दोनों यहां पर मानव उपस्थिति का इरादा रखते हैं। जो भी राष्ट्र पहले ऐसा कर सकता है वो चंद्रमा की स्थिति से परिचित हो जाएगा।

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